भारी हंगामें के बीच यूपी विधानसभा की कार्य वाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में तीसरे दिन कार्यवाही शुरू होने के साथ सबसे पहले पूर्व सदस्य वीरेंद्र सिंह , कुंवर बहादुर सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद सदन में सपा ने खराब क़ानून व्यवस्था पर शोर शराबा, नारेबाजी शुरू कर दी। सपा सदस्य वेल में आ गए। सरकार पर विपक्ष का आवाज़ दबाने का आरोप लगाया। संसदीय कार्य मंत्री ने हंगामे पर कहा यहआतंकवादियो के समर्थक हैं। इनकी सरकार में आतंकियों के मुक़दमे वापस लिए गए। भारी हंगामें के बीच विधानसभा के सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई ।
यूपी विधानसभा मानसून सत्र के तीसरे दिन शनिवार को सीएम योगी विपक्ष पर पूरी तरह अक्रामक रहे। उन्‍होंने कहा कि कुछ लोग तिलक-तराजू के नाम पर समाज में जहर घोलते हैं। राम और परशुराम में भेद बताकर गंदी सियासत करते हैं। जातिवादी, विभाजनकारी, कुत्सित मानसिकता रखते हैं। इसी वजह से देश की खुशी के साथ खुश नहीं हो सकते हैं। देश की खुशी के साथ वही लोग खुश हो सकते हैं जिनमें मर्यादा और धैर्य हो। लोकतंत्र बगैर लोकलाज के नहीं चलता। झूठ का सहारा लेकर कुछ समय के लिए लोगों की आंखों में धूल झोंकी जा सकती है। लेकिन विधाता सब देख रहा है। समय आने पर देश जवाब देगा। जनता जवाब देगी।
मुख्‍यमंत्री ने रामचरित मानस के सीता स्‍वयंवर में धनुष भंग प्रसंग का उल्‍लेख करते हुए कहा कि गोस्‍वामी तुलसीदास ने राम और परशुराम के सम्‍बन्‍धों को रामचरित मानस में स्‍पष्‍ट किया है। इस प्रसंग में राम कहते हैं-‘राममात्र है लघु नाम हमारा, परशुसहित बड़ नाम तुम्हारा, सब प्रकार हम तुमसन हारे, क्षमहु विप्र अपराध हमारे।’

मुख्‍यमंत्री ने कहा कि भगवान राम ने कहा कि उनमें तो एक गुण है, आपमे नौ गुण हैं। हम तो सब प्रकार से आपसे हारे हैं। आप विप्र हैं। हमारे अपराधों को आप क्षमा करें। इसके बाद साक्षात विष्णु के पूर्णावतार श्रीराम को पहचानकर परशुराम ने कहा-‘जै रघुवंश बनज बन भानू, गहन दनुज कुल दहन कृषानू, जय सुर धेनु विप्र हितकारी, जय मद मोह क्रोध भयहारी, विनयशील करूणा गुण सागर, जयति वचन रचना अति सागर।

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