बलूचिस्तान की आजादी के साथ हिंगलाज देवी शक्तिपीठ की वापसी के लिये विश्वशांति यज्ञ

हनुमान चालीसा के 108 बार हवनात्मक यज्ञ के पांचवें दिन हिंगलाज देवी शक्तिपीठ की वापसी के संकल्प के साथ यज्ञ किया गया

वाराणसी। भारत की पवित्रभूमि और शक्तिपीठों की वापसी, इस्लामी जेहादियों से मुक्ति के लिये पातालपुरी धर्म रक्षा परिषद द्वारा पातालपुरी मठ नरहरपुरा में 11 दिवसीय हनुमान चालीसा का 108 बार हवनात्मक यज्ञ का अनुष्ठान किया जा रहा है। यज्ञ के पांचवें दिन पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालक दास जी की अध्यक्षता में पांच वैदिक ब्राह्मणों श्रीराम तिवारी, आनंद मिश्रा, जुगल किशोर तिवारी, चन्द्रभूषण पाठक एवं पंडित वेदप्रकाश मिश्र द्वारा विधि विधान से पाकिस्तान अधिकृत बलूचिस्तान की आजादी और हिंगलाज देवी शक्तिपीठ की वापसी का संकल्प लेकर यज्ञ में आहूति डाली गयी। 11 दिन चलने वाला यह यज्ञ विश्वशांति के लिये किया जा रहा है। विश्वशांति में बाधा उत्पन्न करने वाले कारकों को एक-एक कर खत्म करने के लिये यज्ञ में सभी लिंग और जातियों के लोग न सिर्फ भाग ले रहे हैं बल्कि अनुष्ठान प्रक्रिया को भी पूरा कर रहे हैं। यज्ञ में मुख्य यजमान अयोध्या श्रीराम पीठ के केन्द्रीय व्यवस्था प्रमुख डा० राजीव श्रीवास्तव, विशाल भारत संस्थान की महासचिव अर्चना भारतवंशी, सुभाष मंदिर की पुजारी खुशी रमन भारतवंशी थीं।
पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालक दास जी ने कहा कि भारत के प्राचीनतम् मठों, मन्दिरों, शक्तिपीठों पर इस्लामी जेहादियों ने अनधिकृत कब्जा कर लिया है। भारत और पाकिस्तान के अवैध बटवारे में हमारे हजारों मन्दिर पाकिस्तान के अधिकार क्षेत्र में है। दुनियां के सभी हिन्दू और सभी देश इस बात का निश्चय करंत कि सभी शक्तिपीठों को भारत को वापस किया जाये। पाकिस्तान में हिन्दुओं की सबसे बड़ी शक्तिपीठ हिंगलाज देवी का मन्दिर है, जो इस्लामी देश के किसी काम का नहीं। हिंगलाज देवी शक्तिपीठ की वापसी के लिये प्रार्थना किया गया।


अयोध्या श्रीराम पीठ के केन्द्रीय व्यवस्था प्रमुख डा० राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वशांति के लिये बलूचिस्तान की आजादी जरूरी है। हिन्दुओं के जितने मन्दिर, मठ, पवित्र स्थान पर दूसरे धर्म के लोगों ने कब्जा किया है स्वतः हिन्दुओं को वापस सौंप दें। इससे सभी धर्म के लोग शांति की ओर कदम बढ़ा पायेंगे। अशांति के कारणों को दूर किये बिना शांति की स्थापना सम्भव नहीं है। विश्व समुदाय को यह सोचना चाहिये कि इस्लामी आक्रांताओं द्वारा हिन्दुओं के पवित्र धर्मस्थलों को विध्वंस करने और कब्जा करने के बाद भी हिन्दू समाज ने सहिष्णुता का परिचय दिया और दूसरे के धर्मस्थल पर कभी कब्जा नहीं किया। दुनियां को शांति का मार्ग दिखाने वाले हिन्दू समाज के प्राचीन धर्मस्थलों को वापस कराने का काम विश्व के सभी देश मिलकर करें। हवनात्मक यज्ञ में प्रमुख रूप से डा० निरंजन श्रीवास्तव, अर्चना भारतवंशी, इली भारतवंशी, उजाला भारतवंशी, संदीप चौरसिया, भैयाजी जायसवाल, धनंजय यादव, सनी सिंह, दक्षिता भारतवंशी आदि ने आहूति डाली।

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