पूर्वांचल के समाजवादी दिग्गज ‘‘शारदानंद‘‘ का इसलिए नाम पड़ा ‘‘अंचल‘‘

सामंती उत्पात से निपटने की अगुवाई के लिए हुआ नामाकरण ‘‘अंचल‘‘

बलियाः यूपी के पूर्वांचल से निकलकर प्रदेश में अंचल के नाम से विख्यात हुए 80 दशक के सबसे बड़े समाजवादी नेता शारदानंद यादव बाद में अंचल हुए। क्यों और कब मिला उन्हें यह उपाधि। इसे लेकर रोचक तथ्य को यहां प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है।
बात 70 के दशक की है, सामंती उत्पात से संघर्ष से बने अंचल
शारदानंद अंचल का गृह विधानसभा क्षेत्र बलिया जनपद का बिल्थरारोड विधानसभा क्षेत्र है। जो बिल्थरारोड विधानसभा से पहले सीयर के नाम से जाना जाता था। 70 के दशक में यहां सामंती उत्पात चरम पर था और क्षेत्रीय व्यापारी खौफ में थे। इस दहशत से चट्टान की तरह टकराने के लिए शारदानंद यादव सन 1974 में समाजवादी संघर्ष के रुप में सामने आएं। क्षेत्र के लोगों का उन्हें भरपूर प्यार और सहयोग मिला और कम समय में उनके समर्थकों की टीम बड़ी हो गई।
चारपाई आंदोलन से हुए प्रदेश में चर्चित
बिल्थरारोड विधानसभा क्षेत्र में 70 के दशक में दलित समाज के एक युवक की सिर्फ इसलिए पिटाई कर दी गई कि क्षेत्र के सामंत के सम्मान में वह अपने चारपाई पर बैठा रहा। वह बिल्थरारोड में अपने एक रिश्तेदार के यहां आया था। जिसे यहां का दस्तूर नहीं पता था। जिसके कारण उसे पीटकर अधमरा कर दिया गया। शारदानंद अंचल को जब इसकी जानकारी हुई तो वे इलाके भर के चारपाई को इकट्ठाकर चारपाई आंदोलन किया और पूरे प्रदेश में सामंतवाद के खिलाफ संघर्ष की नजीर पेश की।


संघर्षों के कारण इरफान अहमद ने दिया खिताय-ए-खास
चर्चित शायर इरफान अहमद ने शारदानंद को खिताय-ए-खास का नाम दिया। इसका अर्थ होता है क्षेत्र और इलाके का खास व्यक्ति। जिसे सामाजिक रुप से अमलीजामा पहनाने के लिए नवयुवक दल के एक बैठक में तत्कालीन सभासद कन्हैया लाल ने खिताएखास को आसान शब्द दिया और शारदानंद यादव को अंचल नाम की उपाधि दी। संघर्षो के प्रतिक बन चुके अंचल के बारे में उनके गृह क्षेत्र बिल्थरारोड और पूर्वांचल में कहा जाने लगा कि अंचल नाम ही काफी है।
गृह क्षेत्र से चार बार विधायक और तीन बार विधायक रहे अंचल
अपने गृह विधानसभा क्षेत्र बिल्थरारोड से शारदानंद अंचल चार बार विधायक और तीन बार मंत्री भी रहे। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के काफी करीबी रहे। लेकिन 2010 में उनका निधन हो गया। अंत समय तक वे समाजवादी झंडा बुलंद करते रहे। बिल्थरारोड को समाजवादी गढ़ बना चुके अंचल के गृहक्षेत्र बिल्थरारोड में अंचल के बिना भी अंचल नाम का डंका बजता रहा। उनके प्रति क्षेत्र में जबरदस्त आस्था रही। लेकिन 2012 में परिसिमन के बाद उनका गृह विधानसभा सुरक्षित घोषित हो गया। अंचल नाम के राजनीतिक बुलंदी को बरकरार रखते हुए उनके पुत्र जयप्रकाश ने भी अपने नाम में अंचल जोड़ा और बलिया जनपद के बैरिया विधानसभा सीट से 2012 में जीतकर जयप्रकाश अंचल के रुप में पहली बार सदन गए। अंचल नाम के सहारे ही पूर्व मंत्री की पत्नी शीतला देवी और उनके पौत्र विनय प्रकाश अंचल भी लगातार दो बार सीयर के ब्लाक प्रमुख रहे। आज अंचल नहीं है लेकिन उनके नाम के राजनीतिक संवाहक उनके पुत्र जयप्रकाश अंचल और पौत्र विनय प्रकाश अंचल आगे बढ़ाने में पूरी ताकत झोंक चुके है।

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