समाजवादी नेता शारदानंद अंचल की जयंती आज

चार बार विधायक और तीन बार मंत्री रहे शारदानंद अंचल

बलियाः गरीबों को अपने हक के लिए लड़ने, जूझने व सम्मान के लिए तुफान से भी टकरा जाने का जज्बां जगाने वाले बलिया के शारदानंद अंचल ने मरते दम तक समाजवाद का झंडा लहराया। आज उनकी 74वीं जयंती है। वे बिल्थरारोड से चार बार विधायक और प्रदेश में तीन बार मंत्री रहे है। बलिया जनपद के बिल्थरारोड तहसील के पशुहारी गांव में सामान्य किसान के घर 19 जुलाई 1947 को जन्मे शारदानंद अंचल अपने राजनीतिक जीवन में समाजवादी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चैधरी चरण सिंह एवं राममनोहर लोहिया की राजनीति से प्रभावित रहे और स्वयं किसानों, गरीबों व बेसहारों के दर्द को देख कराह उठते थे। मानवीय संवेदना को लेकर इतने सजग थे कि लोगों की समस्या के निदान तक वे अपनी पूरी ताकत झोंक देते थे और गरीबों को प्रताड़ित करने वाले हर सामंती चट्टान से टकराने के लिए स्वयं मजबूत हथौड़ा बन जाते थे। उन्होंने अपना राजनीतिक सफर कापरेटिव राजनीति से शुरु किया। सहकारिता आंदोलन से जुड़े तो किसानों के दर्द को राष्ट्रीय पटल तक पहुंचाया। लोकदल, जनता दल से लेकर समाजवादी पार्टी के गठन तक वे सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे और बाद में सपा के जिला से लेकर प्रदेश स्तर के विभिन्न पदों पर अपनी प्रमुख भूमिका निभाई। सपा को पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में भी मजबूती से खड़ा किया।

चार बार विधायक और तीन बार मंत्री रहे शारदानंद अंचल

1985 में इंदिरा गांधी की हत्या के कारण देशभर में कांग्रेस की जबरदस्त सहानुभूति लहर के बावजूद अपने बूते लोकदल से शारदानंद अंचल पहली बार सीयर विधानसभा से विधायक हुए। उसके बाद 1989 में जनता दल से 1993 व 2002 में सपा से विधायक बनकर चार बार यूपी के सदन तक पहुंचे। इसमें वे तीन बार पीडब्ल्यूडी-बेसिक शिक्षा, पशुधन व मत्स्य एवं सहकारिता मंत्री रहे। मंत्री रहते उन्होंने प्रदेश में विकास करने के साथ ही उन्होंने अपने गृह क्षेत्र बिल्थरारोड को तहसील का दर्जा दिलाया। यहां सड़क, बिजली, पानी के साथ ही रोडवेज सुविधा, रोडवेज डीपो, मंडी, सीएचसी व अन्य बड़ी योजनाओं को पूरा कराया। बलिया समेत पूर्वांचल के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में पीएचसी व न्यू पीएचसी की भी स्थापना कराया किंतु बलिया की क्षेत्रीय राजनीति के कारण चाहकर भी बलिया में स्वास्थ्य की कोई बेहतर सुविधा न हो सकी।

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सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के अति करीबी शारदानंद अंचल

सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के अति करीबी माने जाने वाले शारदानंद अंचल की बलिया में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा न होने के कारण 2 मई 2010 की सुबह हर्टअटैक से 63 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था। उनके जाने के साथ ही पूरे पूर्वांचल के शोषित, गरीब व जरुरतमंद अंचल बिन पूरी तरह से बेजुबान सा हो गए। अंत समय तक वे समाजवाद के लिए ही जीते रहे। 2 मई 2010 को वे सुबह ही लखनऊ से सीधे बिल्थरारोड सपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में ही भाग लेने को पहुंचे थे किंतु अचानक सीने में दर्द होने के कारण कार्यक्रम स्थल से घर की ओर उन्हें ले जाया गया। समय पर आवश्यक ट्रीटमेंट न मिलने से घर पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो गया।

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