पूर्व पीएम चंद्रशेखर के बिल्थरारोड में एसडीएम की बर्बरता के बीच खल गई जनप्रतिनिधियों की चुप्पी

विजय बक्सरी

बलियाः देश आजाद होने से पांच वर्ष पहले ही तिरंगा संग आजादी का जश्न मनाने वाले एवं देश को युवा तुर्क सरीखे पूर्व पीएम चंद्रशेखर जैसी शख्सियत देने वाले बलिया जनपद के बिल्थरारोड में भाजपा के योगी सरकार में रामराज्य की परिकल्पना देख रहे युवाओं ने अंग्रेजी हुकूमत जैसी निरंकुश अधिकारी की बर्बरता देख अवाक रह गया। राजनीतिक नर्सरी के रुप में चर्चित बागी बलिया से जहां आज भी वर्तमान सरकार में तीन मंत्री, दो राज्यसभा सांसद, दो सांसद, पांच विधायक भाजपा के ही है। वहीं यूपी विधानसभा में प्रतिपक्ष नेता भी बलिया के ही धरती से प्रतिनिधित्व करते है। बावजूद बलिया में अधिकारियों की ऐसी निरंकुशता और सत्ताधारी दलों के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी जनता को तो खलनी ही है। बिल्थरारोड विधानसभा क्षेत्र से जुड़े विधायक-सांसद दोनों ही सत्तापक्ष भाजपा के है। इसके अलावा इसी विधानसभा क्षेत्र के मूल निवासी नीरज शेखर व सकलदीप राजभर राज्यसभा सांसद है। बावजूद पूर्व पीएम चंद्रशेखर जी के गृह विधानसभा क्षेत्र बिल्थरारोड में एसडीएम ने अंग्रेजी हुकूमत की तरह जनता पर बर्बरतापूर्ण लाठी चलाया और लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। जिसकी हर राजनीतिक दल व व्यापारी संगठन ने घोर निंदा किया किंतु इस बीच क्षेत्र से निर्वाचित सांसद-विधायकों की चुप्पी आम जनता को खल गई। क्षेत्र से भाजपा विधायक धनंजय कन्नौजिया तो कोरोना पाॅजिटीव होने के कारण अपने लखनऊ आवास पर होम आइसोलेट और घटना के करीब 15 घंटे बाद शुक्रवार को फेसबुक पर घटना की निंदा और सीएम के कार्रवाई पर खुशी जाहिरकर अपने कर्तव्यों की इतिश्रीकर ली। वहीं सलेमपुर सांसद रविंद्र कुशवाहा भी मानो पांच विधानसभा क्षेत्र वाले अपने लोकसभा में बिल्थरारोड से मिली हार का बदला जनता से चुप्पी साधकर ले रहे है। वहीं घटना के करीब 15 घंटे बाद तक भी एसडीएम के लाठी से जख्मी रजत चैरसिया के परिजनों से स्थानीय नपं चेयरमैन के अलावा किसी भी भाजपा के जनप्रतिनिधि ने मुलाकात तक नहीं किया। जनप्रतिनिधियों की यही चुप्पी जनता को खलने लगी है।

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