सरयू का तांडव जारी, कई गांव प्रभावित

बिल्थरारोड के हल्दीरामपुर रेगुलेटर में रिसाव, ताल व नदी के उफान से मिनी घाघरा सा नाजारा - बहाटपुर, खेतिहरी की आबादी बनी टापू, कई संपर्क मार्ग व सड़क कटा

बलियाः सरयू के जलस्तर में इस वर्ष हुए रिकार्ड बढ़ाव से बिल्थरारोड तहसील के अनेक तटवर्ती इलाकों में कोहराम मचा हुआ है। नदी के बढ़ाव से तटवर्ती तुर्तीपार का मल्लाह बस्ती, यादव टोला, इंद्रानगर, उभांव गांव का चंदनपट्टी, चंदायर बलीपुर का महरोडीह तो पहले से ही डूबा है। इधर हल्दीरामपुर रेगुलेटर में रिसाव से नदी के सामने के गांव पूरी तरह से जलमग्न सा हो गए है। यहां पहले से ही कोइली मुहान ताल में कई नहर व बारिश के पानी से किसान परेशान थे। इसी में नदी का पानी सीधे मिलने से करीब पांच किलोमीटर का एरिया पूरी तरह से मिनी घाघरा नदी में तब्दील सा हो गया है। जिसके कारण शाहपुर अफगां गांव का बहाटपुर से हल्दीरामपुर के बहाटपुर तक करीब एक किलोमीटर के चैड़ाई में पानी पांच से सात फीट तक लबालब भर गया है।

आसपास के करीब 40 गांव इससे पूरी तरह से प्रभावित हो गए है। बहाटपुर व खेतहरी में तो लोग टापू सा जीवन जी रहे है। यहां शौचालय के लिए लोग बाढ़ के ही पानी में ही बांस का मचान बनाकर प्रयोग कर रहे है। जिससे अक्सर बुजुर्ग लोगों, बच्चों व महिलाओं के गिरने व डूबने का भय बना रहता है। पानी के दबाव से बहाटपुर व खेतहरी को जाने वाला संपर्क मार्ग भी कट गया है। जबकि अनेक संपर्क सड़कों पर नाव चल रही है। गांव निवासी गुलाब बिंद, ज्ञानी बिंद, बेचन बिंद, शिवदयाल बिंद व चंद्रभान बिंद ने बताया कि गंवई राजनीति में प्रधान पहले से ही इस गांव के विकास की हत्या कर चुका था। करीब 70 आबादी वाले टोला में महल एक या दो शौचालय ही बने है, वह भी बाढ़ में डूब गए है। लोग पानी में बांस के मचान पर शौच करने को मजबूर है। सड़के यहां है ही नहीं। इस बार रेगुलेटर में रिसाव से पूरा इलाका पूरी तरह से डूब सा गया है। वहीं आसपास के करीब 40 गांव के दो हजार एकड़ फसल डूबकर पूरी तरह से बर्बाद हो चुके है।

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