बलिया में संतपति जी महाराज के अवतार दिवस पर लगा संतों का मेला

बलियाः संत शिरोमणि श्री श्री 108 स्वामी शिवनारायण जी संतपति जी महाराज के 304वें अवतरण दिवस पर मंगलवार को बलिया जनपद के ससना धाम में समारोह का आयोज हुआ। संतपति जी महाराज की पालकी गांव में निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी कलश लेकर शामिल हुई। ससनाधाम स्थित संतपति जी महाराज के समाधी स्थल से स्वामी जी की मनोहारी झांकी गांव के विभिन्न प्रमुख मार्ग होते हुए बहादुरपुर के दुखहरनस्वामी जी महाराज स्थल होते हुए पांच किलोमीटर के चक्रमण के बाद गंतव्य को पहुंच समाप्त हुआ। दोपहर बाद ससना धाम में विश्वगुरू संत अमरजीत जी महाराज के साथ विभिन्न प्रांतों के अनेक अनुयायी पहुंचे। संतों का स्वागत विश्वगुरू संत अमरजीत साहेब व मुल्की महंथ लल्लन दास जी महाराज ने किया।

अमरजीत जी महाराज ने स्वामी जी के जीवन चरित्र पर विस्तार से चर्चा की और मानव सेवा व प्रेम का संदेश देते हुए जीव हत्या रोकने के प्रति लोगों को जागरूक किया। कहा कि संतपति जी महाराज ने इस धरा के जीवात्मा को परमात्मा से मिलन का न सिर्फ रास्ता दिखाया बल्कि परम परमेश्वर से मानव का साक्षात्कार भी कराया। वर्तमान परिवेश में स्वामी जी के संदेश ही समाज में बढ़े मतभेद को दूर करने में सबसे ज्यादा सार्थक है। सत्संग के दौरान कुंवर बहादुर सिंह, मुन्ना, बाबा कन्हैया दास जी महाराज, वीर बहादुर दास जी महाराज पुजारी, मनोज जी, जयप्रकाश शर्मा, चंद्रमा व्यास, संत सजुर अली, श्विनारायण जी, लल्लू जी, त्रिभुवन जी, गिरजा संत, मोहित दास, हरिवंश दास, अशोक सिंह, चंद्रभूषण सिंह, पूर्व प्रधान अजय सिंह, इंद्रप्रताप सिंह इन्नू, नागेंद्र सिंह, ओमप्रकाश गुप्त आदि मौजूद रहे। भोजपुरी कवि जितेंद्र स्वध्यायी, नंद जी नंदा व कल्याण जी ने काव्यपाठ के माध्यम से संतपति जी महाराज के जीवनवृत को रेखांकित किया। पूजन, सत्संग के बाद देर शाम विशाल भंडारा व प्रसाद वितरण किया गया। उक्त अवतार दिवस समारोह में बड़ी संख्या में महिलाएं व मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हुए। 

296 वर्ष पुरानी हस्तलिखित ग्रंथ का होता है पाठ

– विश्वगुरु अमरजीत जी महाराज ने बताया कि संतपति स्वामी शिव नारायण जी महाराज ने करीब 296 वर्ष पूर्व महज सात वर्ष की अल्प आयु में ही कैथी भाषा में गुरु अन्यास ज्ञान दीपक ग्रंथ की रचना की थी। जिसका आज विश्व के करीब 112 देशों में अनुयायी पूरी आस्था के साथ पाठ करते है। करीब 296 वर्ष पुराना कैथी भाषा में हस्तलिखित ग्रंथ का संतपति जी महाराज के समाधी स्थल भव्य ससना धाम पर ही अनुयायियों को दिव्य दर्शन होता है और इसका आज पाठ होता है। उक्त ग्रंथ आरंभ, योग, साहू, चोर, गवन, कामिनी, यम, भक्ति, दस अवतार, चारयुग, चार नायिक व भक्त खंड के तहत 12 भागों में बंटा है। जिसके श्रवणमात्र से लोगों के हर दर्द व कष्ट दूर हो जाते है।

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