अधूरी चकबंदी पूरा करने को एसडीएम को सौंपा ज्ञापन,होगा आंदोलन

बलिया: गांव में विकास को जोड़ने हेतु चकबंदी प्रक्रिया विभागीय बेपरवाही, अनदेखी व शोषणपूर्ण रवैये के कारण ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या का कारण बन गया है। जिससे अधिकांश गांवों में विवाद की स्थिति भी उत्पन्न होने लगी है। बलिया जनपद के बिल्थरारोड तहसील क्षेत्र के तेलमा जमालुद्दीनपुर के ग्रामिणों ने तो चकबंदी विभाग पर करीब चार दशक पूर्व गांव की अधूरी चकबंदी किए जाने का आरोप लगाया है और पुरानी अधूरी चकबंदी को पूरा किए बगैर वर्तमान में नई चकबंदी प्रक्रिया शुरु किए जाने का खुलकर विरोध कर रहे है। जिससे गांव में जबरदस्त तनाव की स्थिति बनी हुई है।

गांव निवासी मुखराम प्रसाद, कांता प्रसाद, विरेंद्र, पारसनाथ यादव, आशीष पांडेय आदि ने इसे लेकर स्थानीय एसडीएम को ज्ञापन सौंपने के साथ ही सीएम, राज्यपाल, डीएम व चकबंदी अधिकारियों को डाक से ज्ञापन भेजा है। साथ ही अधूरे चकबंदी को पूरा किए बगैर नई चकबंदी प्रक्रिया शुरु किए जाने पर आगामी 23 नवंबर से तहसील परिसर में चरणबद्ध तरीके से धरना प्रदर्शन व आमरण अनशन किए जाने की चेतावनी भी दी है। सेवानिवृत शिक्षक मुखराम प्रसाद ने बताया कि विभागीय लापरवाही के कारण करीब चार दशक पूर्व गांव के तीन चैथाई भाग की चकबंदी हो चुकी है।

जिसमें चकमार्ग, नाली, नाली आदि बनी हुई है। उसी की पुनः चकबंदी की जा रही है। जबकि एक चैथाई भाग के लगभग चार सौ एकड़ की भूमि का मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है। गांव के आराजी नं. 463, 495, 496, 518, 519 व 731 आदि भूखण्ड के छूटे गाटो की पैमाईश व मूल्यांकन करके उचित सिंचाई की नाली चकमार्ग बनवाया जाना अतिआवश्यक है। जिसे पूरा किए बगैर नई चकबंदी प्रक्रिया शुरु करना गांव की समस्या कारण बन सकता है। जिसका विरोध करते हुए मुखराम प्रसाद, कांता प्रसाद, विरेंद्र, पारसनाथ यादव, आशीष पांडेय, रविशंकर शर्मा, मोती प्रसाद, बेचन प्रसाद गुप्ता, गोपाल यादव, महेंद्र, रामकरण, रामबचन, रामाश्रय वर्मा आदि ने 23 नवंबर से आंदोलन की चेतावनी दी है।

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