डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना से बदल जाएगा बुंदेलखंड का ओद्योगिक परिदृश्य

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से मिलेगी तरक्की को रफ्तार

गिरीश पांडेय

लखनऊ : बुंदेलखंड। शौर्य और संस्कार की धरती। अब समृद्धि की नयी कहानी लिखेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निजी रूप से प्रदेश के पिछड़ों इलाकों में शुमार बुंदेलखंड के विकास के लिए बेहद संजीदा हैं। बार-बार उनका यह कहना कि आने वाले समय में बुंदेखंड उत्तर प्रदेश का स्वर्ग बनेगा, उनकी प्रतिबद्धता का सबूत है। उनकी मंशा के अनुरूप इस बाबत काम भी जारी है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के जरिए जहां इसकी तरक्की को गति मिलेगी वहीं देश के दूसरे डिफेंस इंडस्ट्रीयल कॉरीडोर (डीआईसी) की स्थापना से यहां का औद्योिगक परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा। डीआईसी के जरिये उत्तर प्रदेश रक्षा विनिर्माण क्षेत्र का नया मैन्यूफैक्चरिंग हब बनेगा। पर इसका सर्वाधक लाभ बुंदेलखंड चित्रकूट और झांसी को मिलेगा।

मालूम हो कि डीआईसी की स्थापना लखनऊ, कानपुर, आगरा, झांसी, चित्रकूट और अलीगढ़ जिलों में की जा रही है। इसके लिए 50 हजार हेक्टेएयर से अधिक की भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। अब तक अलीगढ़, कानपुर, झांसी एवं चित्रकूट जिलों में 1,289 हेक्टेयर से भी ज्यादा भूमि अधिग्रहित हो चुकी है। अतिरिक्त भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। यही नहीं अलीगढ़ में अधिग्रहित भूमि निवेशकों को आंवटित कर दी गई है। यह एक ‘ग्रीन फील्ड‘ परियोजना है, जिसके तहत रक्षा उत्पादन क्षेत्र की इकाइयों को और सुदृढ़ करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अनेक प्रोत्साहन एवं अनुदान की व्यवस्था की है।

नोसेना की हिस्सेदारी से डीआईसी को मिलेगी गति

डीआईसी को गति देने के लिए पिछले दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेवल टेक्ननॉलाजी एक्सीलेरशन कौंसिंल का ऑनलाइन लोकार्पण किया। डीआईसी में भारतीय नौसेना के प्रतिभाग करने से उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) एवं स्टार्ट-अप उद्योगों का खरीददारों से सीधा सम्पर्क होगा। परिणामस्वरूप वे भारतीय नौसेना के जरूरतों को पूर्ण करने में सुगमता होगी। यूपीडा ने आईआईटी, बीएचयू एवं कानपुर के सहयोग से ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स‘ की स्थापना की है.

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