यूपी में तानाशाही फरमान, पांच वर्ष संविदा की नौकरी का प्रारूप युवाओं के डिग्री का मजाक : आद्याशंकर

बिल्थरारोड: कोरोनाकाल में यूपी के युवाओं को वर्तमान सरकार ने बड़ा झटका दिया है। सरकारी नौकरी की जगह अब युवाओं को 5 साल तक संविदा पर रखा जाएगा और इसके बाद तय किया जाएगा कि उन्हें सरकारी नौकरी देनी है या नहीं। इस खबर के सामने आने के बाद नौजवानों ने तीखा विरोध दर्ज कराया है। आम लोग भी इसका विरोध कर रहे है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आद्याशंकर यादव ने कहा है कि 5 साल बाद साक्षात्कार के आधार पर सरकारी नौकरी देने में बड़ा खेल हो सकता है और जिस सरकार की जैसी मानसिकता होगी वह उसी पैमाने पर मापा जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि नौकरी चाहने वाला नौजवान अब फुटबॉल की स्थिति में हो गया है। बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी, बड़े-बड़े कॉलेज, महंगी शिक्षा और डिग्री लेकर जो नौजवान नौकरी पाने के लिए सपने बुनने का काम कर रहे थे। आज उन्हें योगी सरकार ने यह फैसला सुना कर निराश किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा फ़ैसला करके सरकार ने नौजवानों की योग्यता और डिग्री का मजाक उड़ाया है। इस फ़ैसले की वजह से अब नौजवानों को अपनी डिग्री और योग्यता पर कम सरकारों के रहमों करम पर ज्यादा निर्भर रहना होगा। जिस सरकार की जैसी मंशा होगी, उसी तरह का फैसला होगा। अभिभावक अपनी पूरी जीवन की गाढी कमाई अपने बच्चों के भविष्य को बनाने में लगाता है और पूरे जीवन भर अपने को फटे हाल और अभावग्रस्त रखता है। आज योगी सरकार के इस फैसले ने जहाँ अभिभावकों के उम्मीद को रौदने का काम किया है। वहीं उन नौजवानों के सपनों को भी कुचलने का काम किया है, जिन्होंने अपना सुनहरा भविष्य बनाने का सपना देखा था। योगी सरकार के इस तुग़लकी फरमान ने नवजवानों को निराश किया है। नौकरी करने वालों को पचास वर्ष की उम्र में रिटायर करने का फैसला भी चकित करने वाला है, पेंशन भी नही मिलनी है। इनके बच्चो की पढ़ाई और परिवारों का दायित्व का निर्वाहन करना भी मुश्किल भरा होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा फ़ैसला लोकतांत्रिक नहीं बल्कि तानशाही सरकार कर सकती है।

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