यहां हर घर की महिलाएं चलाती है जीवट की नैया

पानी से घिरे महिलाओं को अपने साहस का ही सहारा - सीएम साहब कुछ तो कीजिए...

विजय बक्सरी

बलिया: बलिया में सरयू किनारे बसे बिल्थरारोड तहसील की अधिकांश आबादी हर साल बाढ़, कटान को झेलने के कारण नदी से होने वाले आपदा से जूझने को अभ्यस्त सी हो गई है। इधर नदी से सटे कोइली मुहान ताल व नदी समेत दोहरीघाट पंपकैनाल के नहर के पानी से चैतरफा घिरने के कारण शाहपुर अफगां गांव के बहाटपुर टोला की दर्जनों महिलाएं अपने साहस के सहारे ही पानी के बीच जिंदगी काट रही है और बच्चों के भरण पोषण हेतु जीवट के साथ जिंदगी की नैया पार कर रही है। करीब 60-70 परिवार की यहां की पूरी आबादी चारों तरफ से पानी से घिरने के कारण किसी टापू पर जिंदगी जीने जैसे दुरुह जिंदगी जी रहे है। यहां के हर घर में लगभग सभी महिलाएं व बच्चे व बच्चियां तक छोटी नाव (डेंगी) चलाना जानती है। बिंद, कश्यप व मल्लाह समाज की ये महिलाएं पानी से घिरे अपने घर के आसपास ही नदी व ताल के पानी में बहकर आएं मछली का शिकार भी करती है और डेंगी नाव चलाकर स्वयं बाहर निकल बाजार भी करती है। यहां की महिलाएं गांव की बीमार महिलाओं के इलाज हेतु उन्हें पानी से बाहर निकालती है। जहां से पुरुषवर्ग दूसरे साधन से महिलाओं को अस्पताल पहुंचाते है। गांव निवासी गीता देवी बताती है कि वह घर के हर कार्य के लिए पूरे दिन में करीब 8 से 10 बार नाव से चक्कर लगाती है और गांव के अन्य लोगों का भी सहयोग करती है। वहीं अन्य महिलाएं व बच्चियां भी स्वयं ही नाव को पतवार व बांस के सहारे करीब दो किलोमीटर दूर तक लेकर निकलती है, तब मुख्य मार्ग पर पहुंच पानी से घिरे गांव के बाहर की दुनिया से जुड़ पाती है। यहां पहुंचने पर यहां के लोगों के लिए आजादी के 73 वर्ष बाद भी 21वीं सदी के जिंदगी की परिकल्पना महज एक स्वप्न सा लगता है। ग्रामीणों में गांव के लगातार दूसरी बार हुए प्रधान के उपेक्षापूर्ण रवैये को लेकर जबरदस्त नाराजगी भी है।

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