औसत नंबर पाने के बाद भी 2019बैच के जुनैद बने आईएएस

संभाल रहे सदर एसडीएम का पद

बलियाः मंजिलें उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है…. और इन्हीं हौसलों ने जुनैद अहमद को आईएएस बना दिया। आज जुनैद बतौर एसडीएम बलिया सदर में तैनात है। ये 2019 बैच के आईएएस है, 2018 की यूपीएससी परीक्षा में जुनैद को आल ओवर इंडिया में तीसरा रैंक हासिल हुआ था।
2018 पीएससी के टाॅपर बलिया में है सदर एसडीएम
पीएससी परीक्षा 2018 के टॉपर आईएएस अफसर जुनैद अहमद बलिया के सदर एसडीएम के रूप में कार्यरत है। शासन ने सिविल सेवा 2019 बैच के 17 आईएएस अधिकारियों को ट्रेनिंग पूरी करने के बाद एक महीने पहले ही ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर तैनाती दी है। इन अफसरों को चार माह के लिए केंद्र में प्रथम तैनाती असिस्टेंट सेक्रेटरी के रूप में जाना था, लेकिन कोविड संक्रमण के चलते भारत सरकार ने इसमें छूट दे दी है। ऐसे में एक महीने पहले ही जुनैद अहमद को बलिया सदर एसडीएम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कुछ यूं तय किया सफर
अक्सर लोगों के मन में यह सोच घर कर लेती है कि 60 या 65 फीसदी अंक पाने वाले छात्र कभी आईएएस, आईपीएस नहीं बन सकता। लेकिन जुनैद अहमद ने इसको गलत सिद्ध कर दिया। इन्हें हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट में महज 60 फीसदी अंक ही मिला था। बावजूद इन्होंने आईएएस तक का सफर तय किया। जुनैद अहमद उत्तर प्रदेश के बिजनौर से एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उनके पिता जावेद हुसैन पेशे से वकील है और मां आयश रजा एक हाउस वाइफ है। जुनैद शुरू से ही पढ़ाई में औसत छात्र थे। दसवीं व 12 वीं में 60 फीसदी ही अंक पाए। इसके बाद शारदा यूनवर्सिटी, नोएडा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वहां भी उनके 65 फीसदी तक ही अंक आए। कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद जुनैद के मन में आईएएस अधिकारी का सपना जागा, इस पर उन्हीं के गांव के लोग कहते थे कि 60 प्रतिशत पाने वाला कोई छात्र आईएएस नहीं बन सकता। पर जुनैद ने हार नहीं मानी और आखिरकार पांचवे प्रयास में न सिर्फ यूपीएससी एग्जाम पास किए बल्कि आल ओवर इंडिया तीसरे रैंक भी हासिल किए।
सिर्फ चार ही घंटे करते थे पढ़ाई
आईएएस जुनैद अहमद ने जब सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की तो आठ से दस घंटे लगातार पढ़ाई करते थे। जब बेसिक समझ में आ गई तो पढ़ाई करने का समय घटकर चार घंटे तक सिमट गया। जुनैद का मानना है कि घंटों से पढ़ाई नहीं होती है, जितनी देर पढ़े ध्यान और एकाग्रता की जरूरत होती है।

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