वोकल फाॅर लोकल को गति देगें कॉमन फैसिलिटी सेंटर

अगले छह महीने में बनकर तैयार हो जाएंगे 13 ऐसे केंद्र ,एक छत के नीचे सारी सुविधाएं मिलने से डेढ़ गुना हो जाएगी शिल्पकारों की आय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

गिरीश पांडेय

एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी)को लेकर योगी सरकार की मंशा रंग लाने लगी है। कॉमन फैसलिटी सेंटर्स (सीएफसी) की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उम्मीद है कि जिन जिलों में ऐसे केंद्र बनेंगे वहां एक ही छत के नीचे टेस्टिंग लैब, डिजाइन डेवलमेंट सेंटर, कच्चा माल, कॉमन प्रोडक्शन सेंटर, लॉजिस्टिक,पैकेजिंग, लेवलिंग और बारकोडिंग आदि की सुविधाएं मिलने से इससे जुडे़ लोगों की आय में 25 से 50 फीसद तक की वृद्धि होगी। प्रशिक्षण की वजह से गुणवत्ता और दाम में उत्पाद प्रतिस्पद्धी बनेंगे। इससे और लोग भी अपनी परंपरा को समृद्ध करने के लिए आगे आएंगे।

कैसे होगा ये सब

पशुओं की सींग से संभल में बटन बनते हैं। हार्न बोन के उत्पाद इस जिले का ओडीओपी भी है। तैयार बटन फिनिशिंग के लिए चीन भेजा जाता था। वहां से आने के बाद मांग के अनुसार इनका निर्यात होता था। अब फिनिशिंग की मशीनें ( बटन प्रोसेसिंग यूिनट और वुड सीजनिंग एंड एसीसरी प्लांट) वहां के सीएफसी में लग गयी। अनुमान है कि इससे वहां के कारीगरों की आय 25 से 50 फीसद तक बढ़ जाएगी और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से 1000 हजार लाेगों को रोजगार मिलेगा।

इसी तरह भगवान गौतमबुद्ध से जुड़ा कालानमक धान सिद्धार्थनगर का ओडीओपी है। वहां के सीएफसी में प्रसंस्करण मिल, नियंत्रित तापमान वाला गोदाम और वैक्यूम पैकेिजंग की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे इसकी बिक्री निर्यात में चार गुना और खेती करने वाले किसानों की संख्या में 30 हजार तक की वृद्धि होगी।

उप्र उत्कृष्ट हस्तशिल्प कला की अपनी बेहद संपन्न परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। हर जिले का कोई उत्पाद अपनी खूबी के नाते वहां की पहचान है। मुख्यमंत्री की मंशा है कि समय के अनुसार तकनीक की मदद से इन उत्पादों को गुणवत्ता और दाम में प्रतिस्पद्धी बनाया जाय ताकि इससे जुडे हर वर्ग को लाभ हो। स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिले और प्रदेश का समग्र विकास होगा। इसी मंशा से सीएफसी की स्थापना के साथ वहाँ के ओडीओपी उत्पादों के ब्राडिंग, मार्केटिंग, क्रेडिट, फाइनेंस और संबंधित लोगों के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण के भी काम भी किए जा रहे हैं। नवनीत सहगल: अपर मुख्य सचिव लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग

यह चंद उदाहरण इस बात के प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदियत्यनाथ करीब ढाई साल पहले लांच की गयी अपनी इस फ्लैगिशप योजना को लेकर कितने संजीदा हैं। एक ही छत के नीचे ओडीओपी योजना से जुड़े हुनरमंदों और अन्य लोगों को प्रशिक्षण से लेकर फिनिशिंग तक की सारी सुविधाएं मिले इसके लिए सरकार की योजना हर जिले में सीएफसी बनाने की हैं। एक केंद्र की लागत अधिकतम 15 करोड रुपये होगी। लागत का 90 फीसद सरकार वहन करेगी। बाकी संबंधित संस्था को करना होगा।

मालूम हो कि चंद रोज पहले मुख्यमंत्री ने ऐसे 13 केंद्रों का शिलान्यास किया। इनमें से अंबेडकर नगर, लखनऊ,बरेली, उन्नाव, आगरा, सीतापुर, सिद्धार्थनगर,संभल, वाराणसी, आजमगढ़ और सहारनपुर में एक-एक और मुरादाबाद में दो सीएफसी केंद्र हैं। छह महीने में ये केंद्र काम करना शुरू कर देंगे। अभी करीब डेढ दर्जन केंद्र और पाइपलाइन में हैं। इसके अलावा असिस्टेंस टू स्टेटस फार डेवलपमेंट आफ एक्सपोर्ट इन्फ्रास्टक्चर एंड अदर्स एक्टीविटी स्कीम (एसाइड) योजना के तहत बरेली की दो, फिरोजबाद अमरोहा, आगरा और गौतमबुद्ध नगर के एक-एक सीएफसी का लोकार्पण भी मुख्यमंत्री ने किया था।

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