बलिया एसपी ने सात सिपाहियों को किया लाइन हाजिर

पुलिस लाइन भेजे गए सिपाहियों में कई है कारखास

बलियाः बलिया में पुलिसिंग दुरुस्त करने के लिए एसपी राजकरन नैय्यर ने जनपद के विभिन्न थानों के सात सिपाहियों को लाइनहाजिर कर दिया। पुलिस लाइन भेजे गए अधिकांश सिपाहियों में थानों के कारखास शामिल है। पुलिस विभाग के विभागीय शब्दावली में भले ही कारखास नाम का कोई पद नहीं है लेकिन इंस्पेक्टर और थानाध्यक्षों के कृपा पर बनाएं गए ये कारखास ही थानों के काली कमाई का पूरा लेखा जोखा रखते है और इसका जुगाड़ भी करते है। जिनके स्थानांतरण से थानों में हड़कंप मच गया है। एसपी ने छ थानों से सात सिपाहियों को पुलिस लाइन भेजा है। इनमें बैरिया से दो सिपाही मंजीत यादव एवं देवनाथ शामिल है। जबकि रेवती थाना से सिपाही मनोज सिंह, उभांव थाना के बृजेश सिंह, दुबहड़ थाना के लवकेश पाठक, नगरा से भानू पांडेय और दोकटी से कमलेश कुमार यादव को पुलिस लाइन भेजा गया है। जबकि पुलिस लाइन से महिला कांस्टेबल प्रियंका यादव को सीसीटीएनएस चितबड़ागांव भेजा गया है।

कारखास के रुप में चर्चित रहे है उभांव थाना से बृजेश सिंह और नगरा के भानू पांडेय
– उभांव थाना से पुलिस लाइन भेजे गए बृजेश सिंह भी यहां कारखास के रुप में ही थे। जबकि नगरा के सिपाही भानू पांडेय भी कारखास की भूमिका निभा रहे थे। इनके कारनामे पर्दे के पीछे खुब चर्चित रहे है।

सादे वर्दी में रौब वाले क्या होते है कारखास!
– थानों पर इंस्पेक्टर अपने हिसाब से किसी भी सबसे भरोसेमंद सिपाही को कारखास का तमगा देते है। जो इंस्पेक्टर के हर काली और सफेद कमाई का लेखा रखता है और इसका जुगाड़ भी करता है। इंस्पेक्टर के हर सुविधा का ख्याल रखने वाला ये कारखास ही थाने का सबसे बड़ा राजदार भी होता है। जिसके कार्यशैली पर अक्सर उंगलियां उठती रहती है क्योंकि इनके हिसाब से ही किसी भी मामले में कार्रवाई का रुख तय होता है। इनके मर्जी के बगैर थानों पर कोई निर्णय हो ही नहीं सकता। ये कारखास अपने साहब के पाकेट की व्यवस्था से लेकर थाने के हर खर्च का लेखाजोखा मुजबानी ही रखते है। ये थाने पर हर ताले की चाभी भी कहे जाते है। ये कारखास अक्सर सादे वर्दी में ही रौब में दिखते है।

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