बलिया के संतपति जी महाराज के समाधी स्थल से जुड़ा है 112 देश

मुसलमान भी अनुयायी

बलियाः जनपद के आखिरी छोर पर स्थित बिल्थरारोड तहसील के ससना बहादुरपुर गांव में ससनाधाम से आस्था की डोर विश्व के 112 देशों से जुड़ा है। संत शिरोमणि श्री श्री 108 स्वामी शिवनारायण जी संतपति जी महाराज के समाधी स्थल पर वर्तमान में विशाल व भव्य मंदिर स्थापित है। साथ ही यहां संतपति जी महाराज द्वारा करीब 296 वर्ष पुरानी कैथी भाषा में स्वहस्तलिखित गुरु अन्यास ज्ञान दीपक ग्रंथ भी भक्तों के दर्शन के लिए रखा गया है। जो 112 देशों में फैले संतपति जी महाराज के भक्तों को इस क्षेत्र से जोड़े रखता है। समाधीस्थल पर हर वर्ष कई देशों के अनुयायी व संतों को मेला लगता है।

संतपति जी महाराज के दरबार में मुसलमान भाई भी मत्था टेकते है। संतपति जी महाराज के 304वें अवतार दिवस समारोह के तहत मंगलवार की देर रात तक भजन, कीर्तन में अनेक मुसलमान भक्त भी शामिल हुए और संतपति जी के प्रति आस्था जताते हुए मत्था टेका। इनमें 80 वर्षीय जुल्फकार इंडियन व संत संजूर अली प्रमुख है। जिनका पूरे कार्यक्रम में विशेष सक्रियता चर्चा का विषय बना रहता है। जो अवतार दिवस समारोह में न सिर्फ स्वामी जी की अराधना करते है बल्कि घंटो मंदिर की घंटी बजाते हुए भजन गायन भी करते है। स्वामी जी के प्रति अपनी श्रद्धा दर्शाते हुए किशनगंज निवासी रफीक खान तो यहां आकर रमन यादव बन गया। जिसे स्वामी जी के आशीर्वाद से हिंदू समाज ने अपना भी लिया। वहीं अनेक मुस्लिम महिलाएं भी यहां मत्था टेकती नजर आई।

विश्वगुरू संत अमरजीत साहेब की मौजूदगी में मुल्की महंथ लल्लन दास जी महाराज ने देर शाम बताया कि संतपति स्वामी शिव नारायण जी महाराज ने करीब 296 वर्ष पूर्व महज सात वर्ष की अल्प आयु में गुरु अन्यास ज्ञान दीपक ग्रंथ की रचना की थी। कैथी भाषा में महाराज द्वारा स्वहस्तलिखित ग्रंथ बलिया जनपद के ससनाधाम में ही सुरक्षित रखा गया है और इसका ही आज पूरी आस्था के साथ पाठ किया जाता है। उक्त ग्रंथ आरंभ, योग, साहू, चोर, गवन, कामिनी, यम, भक्ति, दस अवतार, चारयुग, चार नायिक व भक्त खंड के तहत 12 भागों में बंटा है। जिसके श्रवणमात्र से लोगों के हर दर्द व कष्ट दूर हो जाते है। जिसके प्रति विश्व के 112 देशों में फैले अनुयायियों की आस्था अटूट है और हर वर्ष यहां विश्व के कई देशों से अनुयायी यहां पहुंचते भी है किंतु इस बार कोविड-19 के लाकडाउन के कारण अधिकांश देशों से संत नहीं पहुंच सके किंतु यूपी बिहार समेत कई प्रांतों व जनपदों के अनुयायी यहां पहुंचे है।

सत्संग के दौरान कुंवर बहादुर सिंह, मुन्ना, बाबा कन्हैया दास जी महाराज, वीर बहादुर दास जी महाराज पुजारी, मनोज जी, जयप्रकाश शर्मा, चंद्रमा व्यास, संत सजुर अली, श्विनारायण जी, लल्लू जी, त्रिभुवन जी, गिरजा संत, मोहित दास, हरिवंश दास, अशोक सिंह, चंद्रभूषण सिंह, पूर्व प्रधान अजय सिंह, इंद्रप्रताप सिंह इन्नू, नागेंद्र सिंह, ओमप्रकाश गुप्त आदि मौजूद रहे। गायक चंद्रकिशोर पांडेय, डा. मंगला सिंह, भोजपुरी कवि जितेंद्र स्वध्यायी, नंद जी नंदा, गायक नागेंद्र सिंह व कल्याण जी ने काव्यपाठ व गीतों से देर रात तक भजन कीर्तन व गायन में चार चांद लगा दिया।

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